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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 122
समैर्विवाहं कुरुते न हीनैः समैः सख्यं व्यवहारं कथाश्च । गुणैर्विशिष्टांश्च पुरो दधाति विपश्चितस्तस्य नयाः सुनीताः ॥
जो अपने बराबर वालों के साथ विवाह, मित्रता, व्यवहार तथा बावचीत करता है, हीन पुरुषों के साथ नहीं, और गुणों में बढ़े-चढ़े पुरुषों को सदा आगे रखता है, उस विद्वान की नीति श्रेष्ठ है ।
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