मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 11
जाग्रतो दह्यमानस्य श्रेयो यदिह पश्यसि । तद्ब्रूहि त्वं हि नस्तात धर्मार्थकुशलो ह्यसि ॥
तात! मैं चिन्ता से जलता हुआ अभी तक जग रहा हूँ। मेरे लिये जो कल्याण की बात समझो, वह कहो; क्योंकि हम लोगों में तुम्हीं धर्म और अर्थ के ज्ञान में निपुण हो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें