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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 107
त्वरमाणश्च भीरुश्च लुब्धः कामी च ते दश । तस्मादेतेषु भावेषु न प्रसज्जेत पण्डितः ॥
जल्दबाज, लोभी, भयभीत और कामी - ये दस हैं। अतः इन सब लोगों में विद्वान् पुरुष आसक्ति न बढ़ावे।
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