समागमश्च सखिभिर्महांश्चैव धनागमः ।
पुत्रेण च परिष्वङ्गः संनिपातश्च मैथुने ॥
मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिङ्गन, मैथुन में प्रवृत्ति।
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