मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वाक्य वृत्ति • अध्याय 1 • श्लोक 8
अत्र ब्रूमः समाधानं कोऽन्यो जीवस्त्वमेव हि। यस्त्वं पृच्छसि मां कोऽहं ब्रह्मैवासि न संशयः।।
यहाँ समाधान दिया जाता है: जीव कोई अन्य नहीं है, वह वास्तव में “तुम” ही हो। जिसे तुम “मैं कौन हूँ” पूछते हो, वह स्वयं ब्रह्म ही है — इसमें कोई संदेह नहीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वाक्य वृत्ति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वाक्य वृत्ति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें