मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वाक्य वृत्ति • अध्याय 1 • श्लोक 6
तत्त्वमस्यादिवाक्योत्थं यज्जीवपरमात्मनोः। तादात्म्यविषयं ज्ञानं तदिदं मुक्तिसाधनम्।।
यह ज्ञान, जो “तत्त्वमसि” (तू वह है) आदि महावाक्यों से उत्पन्न होता है और जीव तथा परमात्मा के बीच तादात्म्य (पूर्ण एकत्व) को विषय बनाता है, वही मुक्ति का साधन है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वाक्य वृत्ति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वाक्य वृत्ति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें