जिसके कार्य-करण(स्थूल और सूक्ष्म देह-इन्द्रिय-मन) विलीन हो चुके हैं, जो भूतसूक्ष्मों(सूक्ष्म तत्त्वों) से आवृत नहीं है, और जो कर्म-बन्धन(कर्मों की बेड़ियों) से मुक्त है, वह उसी क्षण सद्योमुक्ति(तत्काल मुक्ति) को प्राप्त करता है।
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