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वाक्य वृत्ति • अध्याय 1 • श्लोक 47
तत्त्वमस्यादिवाक्येषु लक्षणा भागलक्षणा। सोऽयमित्यादिवाक्यस्थपदयोरिव नापरा।।
तत्त्वमसि” आदि वाक्यों में प्रयुक्त लक्षणा भाग-लक्षणा (आंशिक अर्थ-ग्रहण) के समान है, जैसे “सोऽयम्” आदि वाक्यों में शब्दों के आंशिक अर्थ से अभिप्राय लिया जाता है।
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