क्योंकि एक ही सत्ता में प्रत्यक्षता(प्रत्यक्ष अनुभव) और परोक्षता(अप्रत्यक्षता) तथा द्वैत(दूसरे का भाव) और पूर्णता का एक साथ होना परस्पर विरुद्ध है, इसलिए यहाँ लक्षणा(लाक्षणिक अर्थ-ग्रहण) का प्रयोग किया जाता है।
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