आलम्बनतया भाति योऽस्मत्प्रत्ययशब्दयोः।
अन्तःकरणसंभिन्नबोधः स त्वंपदाभिधः।।
जो “अस्मत्” प्रत्यय और “प्रत्यय” (अहम्-बुद्धि) के आधार के रूप में प्रतीत होता है, और जो अन्तःकरण से उपहित (सीमित/संयुक्त) चैतन्य-बोध है, वही “त्वम्” पद का अर्थ है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वाक्य वृत्ति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वाक्य वृत्ति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।