वाक्य, वाक्यार्थ के बोध में, दोनों शबल(मिश्रित/उपाधि-युक्त) वाच्यार्थों का त्याग करके प्रवृत्त होता है; हमने भी उसी प्रकार आदरपूर्वक इसका व्याख्यान किया है।
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