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वाक्य वृत्ति • अध्याय 1 • श्लोक 42
तत्त्वमस्यादिवाक्यं च तादात्म्यप्रतिपादने। लक्ष्यौ तत्त्वंपदार्थौ द्वावुपादाय प्रवर्तते।।
"महान वक्तव्य, जैसे 'वह तुम हो', ने अपने गहरे सांकेतिक-अर्थ में 'तुम' और 'वह' दो शब्दों के अर्थ की पहचान स्थापित की।"
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