तदर्थस्य च पारोक्ष्यं यद्येवं किं ततः श्रृणु।
पूर्णानन्दैकरूपेण प्रत्यग्बोधोऽवतिष्ठते।।
यदि इस प्रकार “तत्” पद के अर्थ में पारोक्ष्य (परोक्षता) प्रतीत होती है, तो उसका समाधान सुनो — वह प्रत्यग्बोध(अन्तर्मुख चैतन्य) ही पूर्ण आनन्द(परिपूर्ण सुख) और एकरूप होकर स्थित रहता है।
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