मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वाक्य वृत्ति • अध्याय 1 • श्लोक 25
पुत्रवित्तादयो भावा यस्य शेषतया प्रियाः। द्रष्टा सर्वप्रियतमः सोऽहमित्यवधारय।।
जिसके लिए प्राणी और वस्तुएँ जैसे सन्तान और धन प्रिय हैं, जो एकमात्र दृष्टा और सबका प्रिय है, वही अपने को जानो। 'वह मैं हूँ' - इस प्रकार निश्चय करो और अनुभव करो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वाक्य वृत्ति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वाक्य वृत्ति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें