जो देह और इन्द्रिय आदि हैं, वे हान-उपादान(छोड़ने-ग्रहण करने) की क्रियाओं में समर्थ हैं; और जिसके केवल सन्निधि(उपस्थिति) से ही ये कार्य करते हैं, वही “मैं हूँ” — ऐसा निश्चय करो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वाक्य वृत्ति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वाक्य वृत्ति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।