अनात्मा यदि पिण्डोऽयमुक्तहेतुबलान्मतः।
करामलकवत्साक्षादात्मानं प्रतिपादय।।
यदि यह देह उक्त कारणों से अनात्मा सिद्ध है, तो अब आत्मा को स्पष्ट रूप से करामलकवत्(हथेली में रखे आँवले की तरह प्रत्यक्ष) प्रतिपादित करो।
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