क्योंकि यह देह रूप आदि गुणों से युक्त पिण्ड है, इसलिए यह आत्मा नहीं है, जैसे घट आदि जड़ वस्तुएँ आत्मा नहीं होतीं। यह आकाश आदि महाभूतों के विकार से उत्पन्न होने के कारण भी कुम्भ के समान जड़ एवं परिवर्तनशील है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वाक्य वृत्ति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वाक्य वृत्ति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।