मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वाक्य वृत्ति • अध्याय 1 • श्लोक 12
सत्यानन्दस्वरूपं धीसाक्षिणं ज्ञानविग्रहम्। चिन्तयात्मतया नित्यं त्यक्त्वा देहादिगां धियम्।।
उस सत्य-आनन्दस्वरूप, बुद्धि के साक्षी और ज्ञानस्वरूप को नित्य अपने आत्मस्वरूप के रूप में चिन्तन करो, तथा देह आदि को आत्मा मानने वाली बुद्धि का त्याग करो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वाक्य वृत्ति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वाक्य वृत्ति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें