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वज्रसूचिक • अध्याय 1 • श्लोक 5
तर्हि जातिर्बाह्मण इति चेत्तत्र । तत्र जात्यन्तरजन्तुष्वनेकजातिसंभवा महर्षयो बहवः सन्ति। ऋष्यशृङ्गो मृग्याः कौशिकः कुशात् जाम्बूको जम्बूकात्। वाल्मीको वल्मीकात् व्यासः कैवर्तकन्यकायाम् शंशपृष्ठछत् गौतमः वसिष्ठ उर्वश्याम् अगस्त्यः कलशे जात इति श्रुतत्वात् । एतेषां जात्या विनाप्यग्रे ज्ञानप्रतिपादिता ऋषयो बहवः सन्ति। तस्मान्न जातिब्राह्मण इति ॥
क्या जाति ब्राह्मण है (अर्थात् ब्राह्मण कोई जाति है)? नहीं, यह भी नहीं हो सकता; क्योंकि विभिन्न जातियों एवं जन्तुओं में भी बहुत से ऋषियों की उत्पत्ति वर्णित है। जैसे मृगी से श्रृंगी ऋषि की, कुश से कौशिक की, जम्बूक से जाम्बूक की, वल्मीक (बाँबी) से वाल्मीकि की, मल्लाह (धीवर) कन्या (मत्स्यगन्धा) से वेदव्यास की, शशक पृष्ठ से गौतम की, उर्वशी नामक अप्सरा से वसिष्ठ की, कुम्भ (कलश) से अगस्त्य ऋषि की उत्पत्ति वर्णित है। इस प्रकार पूर्व में ही कई ऋषि बिना (ब्राह्मण) जाति के ही प्रकाण्ड विद्वान् हुए हैं, इसलिए जाति विशेष भी ब्राह्मण नहीं हो सकती।
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