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वैराग्य शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 89
ज्ञानं सतां मानमदादिनाशनं केषांचिदेतन्मदमानकारणं ।। स्थानं विविक्तं यामिनां विमुक्तये कामातुराणामतिकामकारणाम् ।।
अच्छे मनुष्यों में तो ज्ञान उनके मान-मद आदि का नाश करता है; किन्तु दुष्टों में वही ज्ञान मान-मद प्रभृति औगुणों की वृद्धि करता है। एकांत स्थान योगियों के लिए तो मुक्ति दिलानेवाला होता है; किन्तु वही कामियों की कामज्वाला बढ़ानेवाला होता है।
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