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वैराग्य शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 65
यूयं वयं वयं यूयमित्यासीन्मतिरावयोः। किं जातमधुना येन यूयं यूयं वयं वयम्।।
पहले हमारा आपका इतना गाढ़ा सम्बन्ध था कि, आप थे सो मैं था और मैं था सो आप थे। अब क्या फर्क हो गया है, कि मैं – मैं ही हूँ और आप – आप ही हैं?
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