देहधारियों के भोग – विषय सुख – सघन बादलों में चमकनेवाली बिजली की तरह चञ्चल हैं; मनुष्यों की आयु या उम्र हवा से छिन्न भिन्न हुए बादलों के जल के समान क्षणस्थायी या नाशमान है और जवानी की उमंग भी स्थिर नहीं है। इसलिए बुद्धिमानो! धैर्य से चित्त को एकाग्र करके उसे योगसाधन में लगाओ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वैराग्य शतकम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वैराग्य शतकम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।