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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 8
दोहा – सरल बरन भाषा सरल सरल अर्थमय मानि । तुलसी सरलै संतजन ताहि परी पहिचानि ॥
इसमें सरल अक्षर हैं, इसकी सरल भाषा है, इसे सरल अर्थ से भरी हुई मानना चाहिये। तुलसीदासजी कहते हैं, जो सरल हृदय के संतजन हैं, उनको इसकी पहचान हो गयी है अर्थात्‌ वे इस वैराग्य-संदीपनी को सरलता से समझते हैं।
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