तुलसी बेद-पुरान-मत पूरन सास्त्र बिचार ।
यह बिराग-संदीपनी अखिल ग्यान को सार ॥
तुलसीदासजी कहते हैं – इस वैराग्य-संदीपनी में वेद-पुराणों का सिद्धान्त और शास्त्रों का पूर्ण विचार है। यह समस्त ज्ञान का सारतत्त्व है।
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