दोहा –
फिरी दोहाई राम की गे कामादिक भाजि ।
तुलसी ज्यों रबि कें उदय तुरत जात तम लाजि ॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि जब राम की दोहाई फिर गयी (हृदय में भगवान् का प्रकाश तथा विस्तार हो गया), तब कामादि (दोष उसी क्षण से ही) भाग गये, जैसे सूर्य के उदय होते ही उसी क्षण अन्धकार लज्जा (कर भाग) जाता है।
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