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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 59
चौपाई – राग द्वेष की अगिनि बुझानी । काम क्रोध बासना नसानी ॥ तुलसी जबहि सांति गृह आई । तब उरहीं उर फिरी दोहाई ॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि जब राग-द्वेष की अग्नि बुझ गयी, काम, क्रोध और वासना का नाश हो गया और घर में (अन्तःकरण में) शान्ति आ गयी, तभी हृदय में भीतर-ही-भीतर (तुरंत राम की) दोहाई फिर गयी। (फिर अन्तःकरण में अज्ञान तथा उससे पैदा हुए काम-क्रोधादि का साम्राज्य नहीं रहा, वहाँ रामराज्य हो गया, सर्वतोभाव से भगवान्‌ ही छा गये)।
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