महा सांति जल परसि कै सांत भए जन जोइ ।
अहं अगिनि ते नहिं दहैं कोटि करै जो कोइ ॥
जो (संत) जन महान् शान्ति रूप जल को स्पर्श करके शान्त हो गये हैं, वे अहंकार की अग्नि से नहीं जलते, चाहे कोई करोड़ों उपाय करे।
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