मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 54
महा सांति जल परसि कै सांत भए जन जोइ । अहं अगिनि ते नहिं दहैं कोटि करै जो कोइ ॥
जो (संत) जन महान्‌ शान्ति रूप जल को स्पर्श करके शान्त हो गये हैं, वे अहंकार की अग्नि से नहीं जलते, चाहे कोई करोड़ों उपाय करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वैराग्य संदीपनी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वैराग्य संदीपनी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें