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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 53
दोहा – अहंकार की अगिनि में दहत सकल संसार । तुलसी बाँचै संतजन केवल सांति अधार ॥
अहंकार की अग्रि में समस्त संसार जल रहा है। तुलसीदासजी कहते हैं कि केवल संतजन ही शान्ति का आधार लेने के कारण (उससे) बचते हैं।
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