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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 4
सोरठा – अज अद्वैत अनाम अलख रूप-गुन-रहित जो । माया पति सोई राम दास हेतु नर-तनु-धरेउ ॥
जो जन्मरहित है, अद्वितीय है, नामरहित है, अलक्ष्य है, (प्राकृ) रूप और (माया के तीनों) गुणों से रहित है और माया का स्वामी है, वही तत्त्व श्रीरामचन्द्रजी हैं, जिन्होंने (अपने) दास-भक्तों के लिये मनुष्य-शरीर धारण किया है।
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