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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 39
अति ऊँचे भूधरनि पर भुजगन के अस्थान । तुलसी अति नीचे सुखद ऊख अन्न अरु पान ॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि बहुत ऊँचे पहाड़ों पर (विषधर) सर्पों के रहने के स्थान होते हैं और बहुत नीची जगह में अत्यन्त सुखदायक ऊख, अन्न और जल होता है। (ऐसे ही भजन रहित ऊँचे कुल में अहंकार, मद, काम, क्रोधादि रहते हैं और भजन युक्त नीच कुल में अति सुखदायिनी भक्ति, शान्ति, सुख आदि होते हैं; इससे वहीं श्रेष्ठ है)।
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