तुलसी भगत सुपच भलौ भजै रैन दिन राम ।
ऊँचो कुल केहि कामको जहाँ न हरिको नाम ॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि भक्त चाण्डाल भी अच्छा है, जो रात-दिन भगवान् रामचन्द्रजी का भजन करता है; जहाँ श्रीहरि का नाम न हो, वह ऊँचा कुल किस काम का।
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