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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 36
धन्य धन्य माता पिता धन्य पुत्र बर सोइ । तुलसी जो रामहि भजे जैसेहुँ कैसेहुँ होइ ॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि उसके माता-पिता धन्य-धन्य हैं और वही श्रेष्ठ पुत्र धन्य है, जो जैसे-कैसे भी भगवान्‌ श्रीरामचन्द्रजी का भजन करता है।
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