सुनत लखत श्रुति नयन बिनु रसना बिनु रस लेत ।
बास नासिका बिनु लहै परसै बिना निकेत ॥
जो बिना कान के सुनता है, बिना आँख के देखता है, बिना जीभ के रस लेता है, बिना नाक के गन्ध लेता (सूँघता) है और बिना शरीर (त्वचा) के स्पर्श करता है।
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