मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 23
दोहा – तन करि मन करि बचन करि काहू दूखत नाहिं । तुलसी ऐसे संतजन रामरूप जग माहिं ॥
जो शरीर से, मन से और वचन से किसी पर दोषारोपण नहीं करते, तुलसीदासजी कहते हैं कि जगत में ऐसे संतजन श्रीरामचन्द्रजी के रूप ही हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वैराग्य संदीपनी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वैराग्य संदीपनी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें