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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 22
चौपाई – पाप ताप सब सूल नसावै । मोह अंध रबि बचन बहावै ॥ तुलसी ऐसे सदगुन साधू । बेद मध्य गुन बिदित अगाधू ॥
संतजन पाप, ताप और सब प्रकार के शूलों को नष्ट कर देते हैं। उनके सूर्य-सदृश वचन मोहरूपी अन्धकार का नाश कर डालते हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि साधु ऐसे सदगुणी होते हैं। उनके अगाध गुण वेदों में विख्यात हैं।
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