मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 20
अनुभव सुख उतपति करत भय-भ्रम धरै उठाइ । ऐसी बानी संत की जो उर भेदै आइ ॥
संत की वाणी ऐसी होती है कि जो अनुभव-सुख-(आत्मानुभूति के आनन्द) को उत्पन्न करती है, भय और भ्रम को उठाकर अलग रख देती है और आकर हृदय को भेद डालती (हृदय की अज्ञान ग्रन्थि को तोड़ डालती) है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वैराग्य संदीपनी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वैराग्य संदीपनी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें