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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 17
सील गहनि सब की सहनि कहनि हीय मुख राम । तुलसी रहिए एहि रहनि संत जनन को काम ॥
शील (विनय तथा सुशीलता) को पकड़े रहना, सबकी कठोर बातों और व्यवहारों कों सहना; हृदय से और मुख से सदा राम (के नाम तथा लीला-गुणों को) कहते रहना – इस रहनी से रहना ही संतजनों का काम है।
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