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वैराग्य संदीपनी • अध्याय 1 • श्लोक 15
दोहा – एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास । रामरूप स्वाती जलद चातक तुलसीदास ॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि जिसको एकमात्र (भगवान का ही) आश्रय है, एकमात्र (भगवान् ‌का ही जिसको) बल है, एकमात्र (उन्हीं से जिसको) आशा है और (उन्हीं का) भरोसा है, (जिसके लिये) भगवान्‌ श्रीरामचन्द्रजी का रूप ही स्वाती नक्षत्र का मेघ है और (जो स्वयं) चातक (की भाँति उन्हीं की ओर देख रहा है) (वह संत है)।
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