ईश्वर की ऐसी पूजा करना जो किसी भी तरह से उससे भिन्न न हो जो पूजा करता है, या दूसरे शब्दों में यह सोचना कि वह मैं हूँ, किसी भी अन्य प्रकार की पूजा से कहीं अधिक श्रेष्ठ है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
उपदेश सारम के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
उपदेश सारम के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।