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उपदेश सारम • अध्याय 1 • श्लोक 7
आज्यधारया स्रोतसा समम् । सरलचिन्तनं विरलतः परम् ॥
उस ध्यान से बेहतर है जो बार-बार टूटकर आता है, वह ध्यान जो निरंतर बहता रहता है, जैसे गिरते हुए तेल का प्रवाह या कोई बारहमासी जलधारा।
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