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उपदेश सारम • अध्याय 1 • श्लोक 28
किं स्वरूपमित्यात्मदर्शने । अव्ययाऽभवाऽऽ पूर्णचित्सुखम् ॥
यदि कोई अपने हृदय में यह अनुभव कर ले कि उसका वास्तविक स्वरूप क्या है, तो उसे पता चलेगा कि वह अनंत ज्ञान, सत्य और आनन्द है, जिसका न आदि है, न अन्त।
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