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उपदेश सारम • अध्याय 1 • श्लोक 24
ईशजीवयोर्वेषधीभिदा । सत्स्वभावतो वस्तु केवलम् ॥
अपने वास्तविक स्वरूप में जीव और सृष्टिकर्ता दोनों एक ही हैं, अद्वितीय तत्त्व हैं। केवल गुणों और ज्ञान में ही अंतर पाया जाता है।
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