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उपदेश सारम • अध्याय 1 • श्लोक 19
अहमयं कुतो भवति चिन्वतः । अयि पतत्यहं निजविचारणम् ॥
तो फिर यह 'मैं-विचार' कहाँ से जन्म लेता है? सजग और हमेशा सक्रिय मन से इसकी खोज करो, और निराश होकर 'मैं' बन जाओ। यह खोज ही ज्ञान की खोज है।
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