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उपदेश सारम • अध्याय 1 • श्लोक 18
वृत्तयस्त्वहं वृत्तिमाश्रिताः । वृत्तयो मनो विच्यहं मनः ॥
इन सभी विचारों में से यह विचार "मैं" ही मूल है। इसलिए हम देख सकते हैं कि मन वास्तव में केवल "मैं" विचार ही है।
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