मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
उपदेश सारम • अध्याय 1 • श्लोक 17
मानसं तु किं मार्गणे कृते । नैव मानसं मार्ग आर्जवात् ॥
मन की वास्तविक प्रकृति पर निरंतर सतर्कता के साथ विचार करने पर पता चलता है कि मन जैसी कोई चीज नहीं है; वास्तव में, यह सभी के लिए सीधा मार्ग है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
उपदेश सारम के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

उपदेश सारम के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें