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उपदेश सारम • अध्याय 1 • श्लोक 14
प्राणबन्धनाल्लीनमानसम् । एकचिन्तनान्नाशमेत्यदः ॥
जब श्वास के संयम द्वारा मन को वश में कर लिया जाए, तब उसे एक ही धारा में प्रवाहित करो, तब उसका स्वरूप पूर्णतया लुप्त हो जाएगा।
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