मन का दमन दो प्रकार से होता है, अवशोषण और विलोपन; अवशोषण किया हुआ मन पुनः जीवित हो जाता है, किन्तु नष्ट किया हुआ मन पुनः जीवित नहीं हो सकता, क्योंकि वह मर चुका होता है।
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