हृत्स्थले मनः स्वस्थता किया ।
भक्तियोगबोधाश्च निश्चितम् ॥
अपने मूल (हृदय) में पुनः लीन हो जाना ही कर्म, भक्ति, योग, ज्ञान, ये सभी चीजें हैं। या दूसरे शब्दों में कहें तो अच्छे कर्म, भक्ति, योग, ज्ञान भी यही है।
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