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तुलसी • अध्याय 1 • श्लोक 9
नमस्ते नारदनुते नारायणमनः प्रिये । ब्रह्मानन्दाश्रुसंजाते वृन्दावननिवासिनि।।
ब्रह्म के आनन्द रूपी आँसुओं से उत्पन्न होने वाली तुलसी तुम वृन्दावन में निवास करने वाली हो। नारद के द्वारा स्तुत्य आपको नमस्कार है, नारायण भगवान् के मन को प्रिय लगने वाली आपको नमस्कार है।
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