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तुलसी • अध्याय 1 • श्लोक 6
त्वमेव सुरसंसेव्या त्वमेव मोक्षदायिनी। त्वच्छायायां वसेल्लक्ष्मीस्त्वन्मूले विष्णुरव्ययः ।।
तुम देवताओं द्वारा सेवित हो तथा मुक्ति प्रदान करने वाली हो। तुम्हारी जड़ में भगवान् विष्णु तथा छाया में लक्ष्मी का निवास होता है।
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