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तुलसी • अध्याय 1 • श्लोक 5
अतुले त्वतुलायां हि हरिरेकोऽस्ति नान्यथा । त्वमेव जगतां धात्री त्वमेव विष्णुवल्लभा ।।
हे अतुले! तुम्हारे समान केवल भगवान् विष्णु ही हैं, दूसरा कोई नहीं। तुम भगवान् विष्णु को प्रिय हो तथा संसार का पालन करने वाली हो।
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